MP:संतों को राज्यमंत्री बनाए जाने पर भडक़ी कांग्रेस।

भोपाल। मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार अब धार्मिक और समाज के संतों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने में लग गई है। इसी क्रम में उसने नर्मदा नदी के लिए जन-जागरूकता अभियान चलाने के लिए एक विशेष समिति बनाई है। इसमें पांच संत सदस्य है और सभी को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है। लेकिन, 5 संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिए जाने के बाद विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस ने इसे शिवराज सरकार का स्वांग करार दिया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता पंकज चतुर्वेदी ने कहा, ऐसा कर मुख्यमंत्री अपने पापों को धोने का प्रयास कर रहे हैं। यह चुनावी साल में साधु-संतों को लुभाने की सरकार की कोशिश है। आधिकारिक तौर पर जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि राज्य शासन ने प्रदेश के विभिन्न चिन्हित क्षेत्रों विशेष रूप से नर्मदा के किनारे पौधरोपण, जल संरक्षण और स्वच्छता के प्रति निरंतर जन-जागरूकता अभियान चलाने के लिए विशेष समिति गठित की है। इस समिति में बतौर सदस्य नर्मदानंद, हरिहरानंद, कम्प्यूटर बाबा, भैय्यू महाराज और पंडित योगेंद्र महंत को शामिल किया गया है। इन सभी को राज्यमंत्री का दर्जा मिलेगा। संभवत: राज्य के गठन के बाद से यह पहला मौका होगा, जब संतों को राज्यमंत्री का दर्जा दिया जा रहा हो। यह संत सरकार के इस प्रस्ताव को मानते हैं या नहीं, यह आने वाला समय ही बताएगा। लेकिन इतना तो साफ लग रहा है कि संतों के सहारे नर्मदा नदी के संरक्षण का प्रचार-प्रसार किया जाने वाला है। इससे पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नमामि देवी नर्मदे सेवा यात्रा निकाली थी। पौधरोपण किया था, उसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह भी अपनी पत्नी अमृता राय सिंह के साथ पदयात्रा कर रहे हैं।

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