Published On: Tue, Jan 9th, 2018

महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच जरूरी नहीं।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की हत्या के मामले में एमिकस क्यूरी अमरेंद्र शरण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 6 दशक के बाद महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच की उन्हें जरूरत महसूस नहीं होती।
अभिनव भारत, मुंबई के न्यासी पंकज फडणीस ने महात्मा गांधी की हत्या की दोबारा जांच के लिए एक जनहित याचिका दायर की है, जिसमें शरण को एमिकस क्यूरी बनाया गया था। शरण ने जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष मामले का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनकी रिपोर्ट का यही निष्कर्ष निकला है कि हत्याकांड की दोबारा जांच की जरूरत नहीं है। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि महात्मा गांधी की हत्या में नाथूराम गोडसे के अलावा विदेशी खुफिया एजेंसी का भी हाथ था और हत्याकांड से जुड़े कई दस्तावेजों की अनदेखी की गयी है, जिसमें विदेशी साजिश की बू आती थी। न्याय मित्र ने कहा कि इस हत्याकांड में विदेशी खुफिया एजेंसी के शामिल होने का आरोप बेबुनियाद है और इसका कोई साक्ष्य नहीं मिला है। वरिष्ठ अधिवक्ता शरण ने कहा कि उन्हें दस्तावेजों की तहकीकात से गोडसे के अलावा किसी अन्य के शामिल होने के संदेह की गुंजाइश नजर नहीं आती, इसलिए मामले की फिर से जांच कराने की जरूरत नहीं है।

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