Published On: Mon, Oct 30th, 2017

अब क्रिकेटरों का भी होगा डोप टेस्ट : खेल मंत्रालय

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के लिए अब क्रिकेटरों का डोप टेस्ट कराना अनिवार्य होगा, जिसके निर्देश उसे केंद्रीय खेल मंत्रालय की ओर से दिये गये हैं। भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने अब तक खिलाड़ियों की निजता का हवाला देते हुए विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) के नियमों को लागू नहीं किया है। बोर्ड की यह भी दलील है कि बीसीसीआई सरकार से आर्थिक सहायता नहीं लेती है और एक निजी संस्था होने के नाते उसपर वाडा के नियमों को बाध्य नहीं किया जा सकता है। लेकिन खबरों के अनुसार वाडा ने केंद्रीय खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर को पत्र लिखकर कहा है कि वह बीसीसीआई को वाडा के नियमों को लागू करने के लिये बाध्य करे नहीं तो उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे। अगर नाडा ऐसा नहीं कर सकी तो वैश्वक एजेंसी द्वारा उसकी मान्यता खतरे में पड़ सकती है। अब नाडा क्रिकेट के खिलाड़ियों की स्पर्धा के दौरान और स्पर्धा के अलावा डोप टेस्ट करेगी।
खेल मंत्रालय ने भी वाडा के निर्देशों को गंभीरता से लेते हुये बीसीसीआई में डोपिंग नियमों को लागू कराने के लिये उसे अदालत तक ले जाने के संकेत दिये हैं। गौरतलब है कि देश की राष्ट्रीय डोपिंग एजेंसी के बजाय बीसीसीआई अपने खिलाड़यिों के टेस्ट स्वीडन स्थित कंपनी आईडीटीएम से कराता है। खेल सचिव राहुल भटनागर ने कहा, ‘हमने नाडा के महानिदेशक को उनके अधिकारियों को भारतीय क्रिकेटरों के नमूने लेने के निर्देश दिये हैं। बीसीसीआई यदि उन्हें इससे रोकता है तो हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेंगे।’

बीसीसीआई के दबाव में झुकने की संभावना नहीं, बैठक 3 नवंबर को

दिल्ली। भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सीनियर अधिकारी राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) के लगातार दबाव से निबटने के लिए जल्द ही रणनीति तैयार करेंगे। नाडा विराट कोहली और उनके साथी क्रिकेटरों को अपने दायरे में लाना चाहता है। प्रशासकों की समिति (सीओए) की 3 नवंबर को बैठक होगी, जहां इस पर चर्चा होगी और अभी नहीं लगता कि भारतीय क्रिकेट की संचालन संस्था अपना वर्तमान रवैया बदलेगी। बीसीसीआई के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि बोर्ड को नाडा इसलिए अपने दायरे में लाना चाहता है ताकि विराट कोहली या महेंद्र सिंह धोनी  रहने के स्थान संबंधी शर्त पर हस्ताक्षर कर सकें। बीसीसीआई अभी स्वीडन की संस्था अंतर्राष्ट्रीय ड्रग परीक्षण प्रबंधन (आईडीटीएम) की  सेवाएं ले रहा है और उसका उसके साथ बने रहने की संभावना है। रिपोर्टों के अनुसार नाडा घरेलू टूर्नामेंटों के दौरान डोपिंग नियंत्रक अधिकारी (डीसीओ) भेज सकता है और अगर  बीसीसीआई सहयोग नहीं करता है तो वह कानूनी रास्ता अपनाएगा, लेकिन बोर्ड के सीनियर अधिकारियों का मानना है कि क्या सरकारी अधिकारियों के लिए ऐसा करना आसान होगा। शीर्ष भारतीय क्रिकेटर समय समय पर रहने के स्थान की शर्त को मानने से इन्कार करते रहे हैं क्योंकि इससे उनकी निजता का उल्लंघन होता है। बीसीसीआई के एक सीनियर अधिकारी ने गोपनीयता की शर्त पर कहा, बीसीसीआई ने नाडा संहिता पर हस्ताक्षर नहीं किये हैं और इसलिए डोप परीक्षण के लिये अपने क्रिकेटरों को भेजना अनिवार्यता नहीं है।